अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस |बेटी बचाओ, बेटी पढाओ

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अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस
मातृ संगोष्ठी

दुनिया भर में हर साल 8 मार्च को महिला दिवस मनाया जाता है।

महिला दिवस के नाम से ही जाहिर है कि ये दिन महिलाओं को समर्पित है

महिला दिवस के बहाने हम देश-दुनिया की ऐसी महिलाओं को याद करते हैं जिन्होंने वैश्विक पटल पर अपनी अमिट छाप छोड़ी है। इस खास दिन को मनाने का मकसद उन महिलाओं की उपलब्धियों, उनके जज्बे, उनकी ऐतिहासिक यात्राओं और उनके जीवन को याद करना हैं।

बेटी बचाओ, बेटी पढाओ

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भारतीय महिलाओं को नए भारत के उभरते परिदृश्य में एक सशक्त हस्तक्षेप के रूप में देखने के पर्याप्त कारण हैं। महिलाओं से जुड़े नियम, कानून, संवैधानिक प्रावधान, मीडिया, सरकार की नीतियां व कार्यक्रम, पंचायतों व विधान सभाओं तथा संसद में उनका प्रतिनिधित्व, जेंडर बजटिंग, उद्यमिता व कौशल विकास कार्यक्रम तथा बैंकिंग एवं लघु ऋण योजनाएं, स्व-सहायता समूह और मनरेगा जैसे प्रयास मिल-जुलकर महिलाओं के नए भारत में मददगार बने हैं।

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महिला दिवस पर दीप प्रज्वलित करते महाविद्यालय के प्राचार्य अजीत पाण्डे

इस अवसर पर पूरनमल बाजोरिया शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय नरगाकोठी चम्पानगर भागलपुर में एक दिवसीय विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया गया

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलित कर के किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में बहन ब्रह्माकुमारी निर्मला, ब्रह्माकुमारी रुपाली, श्रीमती बबीता मोदी, राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित डा०उलूपी झा , प्रोफेसर महेश कुमार , महाविद्यालय के प्राचार्य डा० अजीत कुमार पाण्डेय जी उपस्थित रहे।

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कार्यक्रम की शुरुआत श्री राजीव शुक्ल जी ने अतिथि परिचय से एवं विषय प्रवेश श्रीमती सरिता कुमारी जी द्वारा किया गया ।

कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रीय सेविका समिति की प्रान्त प्रमुख श्रीमती बबीता जी ने कहा कि अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस सभी महिलाओं को अवसर देती है कि वह पूर्व के कार्यों से सबक सीख कर भविष्य के लिए नवीन संकल्प लें। उन्होने बताया कि पूरे भारत में आज महिलायें हर क्षेत्र में चाहे सेवा, प्रशासन, स्वास्थ्य शिक्षा , पुलिस, विज्ञान हर क्षेत्र में अपना परचम लहराया हैं।
बहन ब्रह्माकुमारी निर्मला जी ने इस दिवस की बधाई देते हुए कुछ प्रेरणादायक प्रसंग के माध्यम से महिलाओं को प्रोत्साहित किया एवं बेटियों के सशक्तिकरण के लिए ब्रह्माकुमारी संस्था के तरफ से संचालित हो रहे कार्यक्रमों का जिक्र किया।
ब्रह्माकुमारी रुपाली जी ने आज के दिन की बधाई देते हुए बताया की यह बहुत गर्व का दिन हैं। उन्होने बताया कि हजारों फूल चाहिए एक माला के लिए, हजारों बूंद चाहिए सागर बनाने के लिए, परन्तु केवल एक नारी ही काफी है घर को स्वर्ग बनाने के लिए।

कार्यक्रम के अगले वक्ता के रूप में राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित, लोक कला की निधि, अंग गौरव एवं मंजूषा कला की हस्ताक्षर डा० उलूपी झा ने बताया कि प्राचीन काल से ही भारतीय महिलाओं की योग्यता का डंका पुरे विश्व में बजा है। उन्होने बताया कि वेद में भी अंकित है कि जहाँ नारी की पूजा होती हैं वहां देवताओ का निवास होता है।

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वर्तमान समय में नारी हर क्षेत्र में सर्वोच्च स्थान पर सुशोभित है। अभी आवश्यकता है कि जो क्षेत्र अभी पिछड़े है वहां की महिलाओं को भी मुख्य धारा में शामिल करना है।
कार्यक्रम के अगले वक्ता प्रोफेसर महेश कुमार जी ने प्राचीन समय से वर्तमान तक महिलाओं के अभूतपूर्व योगदान के सम्बन्ध में जानकारी दी तथा सुनहरे भविष्य की कामना की।

कार्यक्रम के अन्तिम चरण में महाविद्यालय के प्राचार्य डा० अजीत कुमार पाण्डेय जी ने महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने पर जोर दिया। डा० अजीत कुमार पाण्डेय जी ने कार्यक्रम की सफलता हेतु सभी उपस्थित अतिथि, आचार्य, एवं छात्राध्यापकों को धन्यवाद दिया।
उक्त अवसर पर महाविद्यालय के प्राध्यापकों सहित शिक्षणेत्तर कर्मचारी उपस्थित रहे।

 

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