झारखंड में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का छापेमारी, जाने कहां मिला 30 करोड़ रुपया

न्यूज डेस्क:    नेता जब जनता के धन का शोषक बन जाए तो क्या कहा जाए। पिछले साल झारखंड के कांग्रेस सांसद धीरज साहू के ठिकानों से 500 करोड़ रुपए मिलने के बाद पूरे देश में राजनीतिक भूचाल आ गया था।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार को रांची में एक बड़ी करवाई की है। ईडी ने झारखंड सरकार में ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम के निजी सचिव (पीएस) संजीव लाल, उसका नौकर जहागीर आलम और अन्य 10 करीबियों के ठिकाने पर देर रात का छापे मारे। ईडी के टीम ने जहांगीर के फ्लैट से 30 करोड़ रूपए नगद बरामद किए है। नोटों के गिनती के लिए ईडी के टीम को काफी मशक्कत करना पड़ा। नोटों के गिनती के लिए करीब 10 मशीन और बैंक के कई कर्मचारियों को लगाना पड़ा। मंत्री आलमगीर आलम के करीबी मुन्ना सिंह के घर से भी 4 करोड़ रुपया जफ्त हुआ है। ईडी ने यह करवाई वीरेंद्र राम से जुड़े एक मामले से किया है। ईडी अपने के करवाई के दौरान पीएस संजीव लाल को साथ रखा था। करवाई के दौरान पीएस संजीव लाल बार-बार बेहोश हो रहा था। ईडी के इस छापेमारी के बाद से आलमगीर आलम का नाम चर्चा में आ गया है। लोकसभा चुनाव के कारण विपक्षी पार्टियां के निशाने पर कांग्रेस पार्टी आ गई है।

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कौन है आलमगीर आलम
आलमगीर आलम झारखंड के कांग्रेस पार्टी के बड़ा चेहरा में आता है। पाकुड़ विधानसभा से यह चार बार विधायक रहा है। 3 साल झारखंड विधानसभा के अध्यक्ष भी रहे है। राजनीति इन्हे विरासत में मिला है। अपने राजनीति की शुरुआत सरपंच का चुनाव जीतकर शुरू किए है। साल 2000 में पहली बार विधायक बने। साल 2005 में पाकुड़ विधानसभा से विधायक बने और अभी भी इस सीट से विधायक है।

सीएम चंपई सौरेन के साथ ली थी मंत्री पद की शपथ
मंत्री आलमगीर आलम के राजनीतिक कद का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते है की झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के जेल जाने के बाद नई सरकार चंपई सोरेन के साथ ही मंत्री पद की शपथ ली थी। चंपई सोरेन सरकार में कांग्रेस कोटे से मंत्री बनने पर विवाद चल रहा था। चंपई सरकार में कांग्रेस कोटे से पुराने चेहरे को मंत्री बनाने से विधायकों में पार्टी नेतृत्व के प्रति गहरी नाराजगी थी। इसके बाबजूद भी आलमगीर आलम हेमंत सोरेन सरकार में मंत्री बने और चंपई सोरेन सरकार में भी।

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