बिहार के विकास की नई उड़ान या अधूरे वादों की हकीकत?
बिहारवासियों के लिए राहत की खबर! पटना से मोकामा के बीच यात्रा अब सिर्फ 1 घंटे में पूरी की जा सकती है। बख्तियारपुर-मोकामा के बीच 44.6 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड फोरलेन हाईवे को यातायात के लिए खोल दिया गया है। इससे न केवल समय की बचत होगी बल्कि सफर भी सुगम हो जाएगा। लेकिन क्या यह हाईवे वास्तव में पूरी तरह तैयार है या फिर अभी भी कुछ अधूरी कड़ियां हैं?
🚧 बख्तियारपुर-मोकामा: सफर तेज़, लेकिन अधूरे काम का साया?
बख्तियारपुर से मोकामा की यात्रा, जो पहले 2 घंटे तक का समय लेती थी, अब सिर्फ 30 मिनट में पूरी की जा सकती है। लेकिन इस रफ्तार में एक रुकावट भी है— बख्तियारपुर के पास रेलवे ओवरब्रिज (ROB) का एक हिस्सा अधूरा पड़ा है। इसके चलते अभी भी 1 किलोमीटर की सड़क पर टू-लेन आवागमन हो रहा है।
🤔 क्या यह अधूरा पुल आने वाले दिनों में परेशानी का सबब बनेगा?
🤔 क्या जल्दबाजी में हाईवे खोलने का फैसला सही था?
📍 किन जिलों को होगा सीधा फायदा?
यह हाईवे सिर्फ पटना और मोकामा के यात्रियों के लिए ही नहीं, बल्कि लखीसराय, बेगूसराय, मुंगेर, भागलपुर, जमुई, शेखपुरा, पूर्णिया और खगड़िया जिलों के लोगों के लिए भी वरदान साबित होगा। इतना ही नहीं, यह असम के गुवाहाटी और भूटान तक जाने वाले यात्रियों के लिए भी फायदेमंद रहेगा।
✅ कम समय में लंबी दूरी तय करने की सुविधा
✅ राज्य के अन्य जिलों को बेहतर कनेक्टिविटी
✅ आर्थिक विकास और व्यापार के नए अवसर
लेकिन सवाल यह उठता है—
🤔 क्या यह हाईवे लंबे समय तक बिना किसी बाधा के चालू रह पाएगा?
🤔 क्या सड़क निर्माण की गुणवत्ता उच्च स्तर की है?
🚦 अस्थायी डायवर्जन और ट्रैफिक की चुनौती
NHAI अधिकारियों के अनुसार, मोकामा से पटना जाने वालों को अभी भी बख्तियारपुर के पास अस्थायी डायवर्जन का सामना करना पड़ रहा है। आरओबी का कार्य मई तक पूरा होने की उम्मीद जताई जा रही है। लेकिन क्या वास्तव में यह समय सीमा पूरी होगी, या फिर यह भी अन्य सरकारी प्रोजेक्ट्स की तरह देरी का शिकार हो जाएगा?
🤔 क्या यात्रियों को मई के बाद भी डायवर्जन से जूझना पड़ेगा?
🤔 क्या निर्माण कार्य तय समय पर पूरा होगा?
🛣️ चौड़ी सड़कें, आसान सफर, लेकिन क्या जाम से पूरी तरह राहत?
पहले पटना से बख्तियारपुर तक फोरलेन मार्ग था, लेकिन बख्तियारपुर से मोकामा तक संकीर्ण सिंगल लेन सड़क के कारण जाम और भीड़भाड़ की समस्या बनी रहती थी। अब ग्रीनफील्ड फोरलेन चालू होने से इन दिक्कतों से काफी हद तक राहत मिलेगी।
✅ यात्रा समय में भारी कटौती
✅ यातायात सुगम और व्यवस्थित
✅ लॉजिस्टिक्स और परिवहन क्षेत्र को बढ़ावा
लेकिन सवाल यह है—
🤔 क्या हाईवे पर भारी वाहनों का दबाव ट्रैफिक समस्या को बढ़ाएगा?
🤔 क्या सुरक्षा उपायों को पूरी तरह लागू किया गया है?
📢 जनता की राय ज़रूरी! आपकी क्या राय है?
🔹 क्या आपको लगता है कि यह हाईवे बिहार के विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगा?
🔹 क्या सरकार को अधूरे कार्य पूरे किए बिना हाईवे चालू कर देना चाहिए था?
🔹 क्या इस प्रोजेक्ट से जुड़ी कोई छुपी हुई सच्चाई भी है?